हाट कालिका देवी मंदिर, Pithoragarh


उत्तराखण्ड ऋषियो की तपोस्थलि होने के कारण देवभूमि के नाम से जानी जाती है , उत्तराखण्ड ३३ करोड देवी देवताओ का घर माना जाता है , उत्तराखण्ड के पिथौरागढ जिले मे स्थित गंगोलीहाट नामक स्थान देवी कालिका के विशेष चमत्कारों से भरा है . गंगोलीहाट पिथौरागढ जनपद से ७७ किमी की दूरी पर स्थित है , यह स्थान पौराणिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है , पूरे कुमाऊं में हाट कालिका के नाम से विख्यात गंगोलीहाट के महाकाली मंदिर की कहानी भी उसकी ख्याति के अनुरूप है। पांच हजार साल पूर्व लिखे गए स्कंद पुराण के मानसखंड में दारुकावन (गंगोलीहाट) स्थित देवी का विस्तार से वर्णन है।सरयू तथा राम गंगा नदियों बीच स्थित होने के कारण इस क्षेत्र को पूर्वकाल में गंगावली कहा जाता था, जो समय के साथ बदलकर गंगोली हो गया। तेरहवीं शताब्दी से पहले इस क्षेत्र पर कत्यूरी राजवंश का शासन था। गंगोलीहाट इस गंगोली क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था। गंगोलीहाट मे स्थित मां काली का शक्तशक्ति पीठ सुंदर देवदार के पेडो के बीच स्थित है ,आगे से हिमालय का अदभुद दृश्य मन को शांति प्रदान करता है , मान्यताओ के अनुसार छठी सदी में गंगोली (गंगोलीहाट का प्राचीन नाम) में असुरों का आतंक था। तब मां महाकाली ने रौद्र रूप धारण कर आसुरी शक्तियों का विनाश किया लेकिन माता का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इलाके में हाहाकार मच गया। इलाका जनविहीन होने लगा। उसी समय अपने कूर्मांचल के भ्रमण पर निकले आदि गुरु शंकराचार्य ने गंगोली में किसी देवी का प्रकोप होने की बात सुनी। शंकराचार्य के मन में विचार आया कि देवी इस तरह का तांडव नहीं मचा सकती। यह किसी आसुरी शक्ति का काम है। लोगों को राहत दिलाने के लिए वह गंगोलीहाट को रवाना हो गए।बताया जाता है कि जगतगुरु जब मंदिर के 20 मीटर पास में पहुंचे तो उनके कदम आगे नहीं बढ़ पाए। शंकराचार्य को देवी शक्ति का आभास हो गया। वह देवी से क्षमा याचना करते हुए पुरातन मंदिर तक पहुंचे। पूजा, अर्चना के बाद मंत्र शक्ति के बल पर महाकाली के रौद्र रूप को शांत कर शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया और गंगोली क्षेत्र में सुख, शांति व्याप्त हो गई ,कालिका मंदिर में कुमाऊं क्षेत्र के लोगों के लिए अत्यंत धार्मिक महत्व है, विशेष रूप से भारतीय सेना के कुमाऊं रेजिमेंट के बहादुर सैनिको का। एक किंवदंती यह है कि एक बार एक अशांत समुद्री तूफान जहाज को उड़ा ले गया, जिसने कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिक थे , जब जहाज को डूबने से बचाने के सभी प्रयास विफल हुए, तब सभी सैनिकों ने अपने ईष्ट देवो को याद किया,जैसे ही कुमाऊ रेजीमेंट के सैनिको ने देवी हाट काली का नारा लगाया तथा प्रार्थना की वैसे ही मां हाट कालिका की कृपा से, जहाज चमत्कारी रूप से किनारे पर सुरक्षित रूप से पहुंचा। तब से कुमाऊं रेजिमेंट के सदस्य हाट कालिका को 'ईष्ट देवी' या कुमाऊं रेजिमेंट की संरक्षक देवी मानते हैं। कुमाऊं रेजिमेंट की गाथा और 1 9 71 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनकी उपलब्धियों को मंदिर की दीवारों पर चित्रित किया गया है, हाट कालिका का यह मंदिर अपार विश्वास का केन्द् है , दूर दूर से लोग मां के दर्शन हेतु आते है , मंदिर मे माता के निवास को लेकर कहा जाता है कि महाआरती के बाद शक्ति के पास जब महाकाली का विस्तर लगाया जाता है तो प्रात: काल विस्तर यह दर्शाता है कि मानों यहां साक्षात् कालिका विश्राम करके गयी हों क्योंकि विस्तर में सलवटें पड़ी रहती हैं।

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