कोट भा्मरी देवी मंदिर, Bageshwar


कत्यूर घाटी के मध्य में स्थित कोट भ्रामरी मंदिर जिसे कोट की मय्या के नाम से भी जाना जाता है, यह मंदिर बागेश्वर जिले से २५ किमी.आगे गरूड मे स्थित है। कोटभ्रामरी के इस मंदिर में वर्ष में दो बार विशाल मेला लगता है। चैत्र मास की शुक्ल अष्टमी को भ्रामरी देवी की पूजा अर्चना के साथ मेला लगता है।मान्यताओ के अनुसार करीब 2500 वर्ष ईसा पूर्व से सातवीं ईसवी तक यहां पर कत्यूरी राजाओं का शासन रहा। इन्हीं कत्यूरी राजाओं ने कत्यूर घाटी के महत्वपूर्ण स्थानों को किले के रुप में स्थापित किया था। कोट भ्रामरी मंदिर की स्थापना के सम्बंध में कहा जाता है कि कत्यूर क्षेत्र में अरुण नामक दैत्य का बेहद आतंक था। उसी दौरान कत्यूरी राजा आसंति देव और बासंति देव कत्यूर को राजधानी बनाने की सोच रहे थे। दैत्य से पीड़ित जनता ने तब राजाओं से अपनी व्यथा कहीं तब कत्यूरी राजाओं का दैत्य से भयंकर युद्ध हो गया। लेकिन राजाओं को पराजय का मुंह देखना पड़ा। कहा जाता है कि तब राजाओं ने भगवती मां से दैत्य के आतंक से निजात दिलाए जाने की प्रार्थना की। राजाओं द्वारा विधि-विधान से पूजा अर्चना करने के बाद मैया (देवी दुर्गा) भवरे के रुप में प्रकट हुई तथा मैया ने अरुण नामक दैत्य का वध कर दिया। तब कहीं जाकर जनता को दैत्य के आतंक से मुक्ति मिली। मैया की इसी अनुकंपा के कारण ही मैया की भंवर के रुप में पूजा होती है,तब से यह मंदिर कोट भा्मरी के नाम से जाना जाता है।माता के भवर रूप का वर्णन पुराणो मे भी मिलता है ! कोट मंदिर में कत्यूरी राजाओं की अधिष्ठात्री देवी भ्रामरी तथा चंदवंशावलियों द्वारा प्रतिष्ठापित नंदा देवी स्थापित की गई है। भ्रामरी के रुप में देवी की पूजा-अर्चना यहां मूíत के रुप में नहीं बल्कि शक्ति रूप में की जाती है।
एक मान्यता के अनुसार जगत गुरू आदि गुरू शंकराचार्य जब अपने गढवाल भमण पर निकले तब उन्होने यहां पर आराम किया था !

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